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चित्रकार ए. रामचन्द्रन की कला : आधुनिकतावाद को खारिज करती एक सौन्दर्य दृष्टि

क्षणे-क्षणे यन्नवतामुपैति तदेवरूपं रमणीयतायाः ! – माघ रामचन्द्रन के चित्रों से गुज़रना भारतीय वाङ् मय से गुज़रने जैसा है। रामचन्द्रन के चित्रों को देखना भारतीयता का सिंहावलोकन करना है। रामचन्द्रन के चित्रों का अवलोकन भारतीय समाज के विकास का अवलोकन है। आप भारतीय सौन्दर्य दृष्टि से भी परिचित होते हैं। यानी समय और समाज के […]



विजय शंकर

संपादक



चिलिका

– राधानाथ राय उत्कल कमला की विलास-पल्वलिका1 नीले जल वाली हंस-मालिनी चिलिका, उत्कल का गौरव-अलंकार तू ही है, उत्कल-भू-शोभा का अगार तू ही है! जिसका स्वभाव: भावुक-मानस हुलसाती वह सलिल-राशि तेरी दिगंत तक छाती, गोरी प्रसन्नवदना दिग्वधुएँ झुककर जिसमें अपनी मुखश्री निहारतीं जी भर। 1. उत्कल कमला की विलास-पल्वलिका1 नीले जल वाली हंस-मालिनी चिलिका, उत्कल […]



जातीय अस्मिता की बानगी

‘क’ (कला सम्पदा एवं वैचारिकी) हिन्दी भाषा की एक बहुआयामी एवं बहुउद्देशीय कला पत्रिका है। हमारा साम्प्रतिक लक्ष्य भिन्न भारतीय भाषाओं के प्रमुख कवियों को पाठकों के समक्ष उपस्थित करना एवं उनकी कृतियों की आलोचना एवं समीक्षा करना है। यह प्रचेष्टा का एक पहलू है। विभिन्न भाषाओं के साहित्य, साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमियों के बीच […]