Posts Tagged ‘ कविताएं ’

विन्दा करंदीकर की कविताएँ

यन्त्रावतार आओ हे यन्त्र, आओ! षस्यष्यामला सृश्टि को गले लगा समाजपुरुश ने जो मैथुन किया उस उत्कट सुरत के विज्ञानात्मक दाहक वीर्य से फ़ौलादी जिसका पिण्ड बना वह तुम अवतारी यन्त्र! युगधर्म का संवर्धन करने आओ आओ, क्रान्ति की प्रसववेदनाओं को लेकर आओ इतिहास के गर्भ का कर विच्छेद त्रिविक्रम के ग्यारहवें हे अवतार! आओ […]



कवि हरिभजन सिंह की कविताएं

-अनुवाद: गगन गिल अँधेरी रात में जिस हाथ ने सुलगता जिस्म तुम्हारा छू लिया है वही हाथ सुलगता है अग्नि के कुंड में से जो चुल्लू भरा था आचमन के लिए मैंने न उसे अचव ही सका न उसे गिरा ही सका पहली बार मेरे जिस्म की सारी दरारें बेबस लगती हैं कोई जल है […]



कवि हरिभजन सिंह की कविताएं

दीवार: कहीं कोई दीवार उभर रही है चुपचाप, अचेत, अदृश्य देह को सहला-सहला जाती पौष-माघ की धूप जितना भी खटका नहीं उसका दबे पाँव चली आती मौत जितना भी सन्देह नहीं उस पर लेकिन कोई दीवार उभर रही है ज़रूर…. -अनुवाद: मनजीत कौर भाटिया दीवार कहीं कोई दीवार उभर रही है चुपचाप, अचेत, अदृश्य देह […]