विन्दा करंदीकर की कविताएँ
By admin | April 27th, 2010 | Category: कविताएं | 1 Comment »यन्त्रावतार आओ हे यन्त्र, आओ! षस्यष्यामला सृश्टि को गले लगा समाजपुरुश ने जो मैथुन किया उस उत्कट सुरत के विज्ञानात्मक दाहक वीर्य से फ़ौलादी जिसका पिण्ड बना वह तुम अवतारी यन्त्र! युगधर्म का संवर्धन करने आओ आओ, क्रान्ति की प्रसववेदनाओं को लेकर आओ इतिहास के गर्भ का कर विच्छेद त्रिविक्रम के ग्यारहवें हे अवतार! आओ [...]