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    Oct 8th, 2010 By असमय की कथा
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    यह असमय की कथा है। तब मनुष्य नहीं थे। न उसका सोच था, न समय, न उसका अंह था न उसका स्वार्थ। किसी महासंग्राम की बेला में ईश्वर ने सोचा होगा एक ऐसे जीव की रचना करें जो न सुर हो न असुर। इन दोनों के बीच का प्राणीकृ जो अपने सोच से, आचरण से, [...]


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image Dialouge
Dialouge with the Curator Seema Bawa (Excerpts) Seema Bawa : All art emerges from an awareness of tradition and its interrelationship to material, philosophic or moral worlds. One can see this in your painting through the ...
image कन्नड़ पुराकथा
पुण्यकोटि जब मुझे पता चला कि सिद्धार्थ गौ शृंखला पर काम कर रहे हैं तो मुझे पुरानी गाथा ‘गोविना हाडु’ की याद आ गयी जो कर्नाटक के घरों में आज भी गायी, सुनी और सुनायी जाती ...
image चित्र के छह अंगकृ (रवीन्द्रनाथ ठाकुर की व्याख्या)
कामसूत्र के प्रथम अधिकरण के तीसरे अध्याय की टीका करते हुए यशोधर पंडित ने आलेख्य (चित्रकला) के छह अंग बताये हैं। रूपभेदाः प्रमाणनि भावलावण्ययोजनम्। सादृश्यं वर्णिकाभंग इति चित्र षंड्गकम।। एक ने कहा अनेक होंगे, ऐसा हुआ सृष्टि का ...
image चित्रकार सिद्धार्थ विरचित महाकाव्यः
चैत्र कृष्णपक्ष त्रयोदशी, विक्रम संवत् 2066 बारहमाहा (ऋतुचक्र) पर काम करते हुए मैं निरन्तर बदलते मौसम, हर महीने बदलते तापमान, बदलते फूलों-पक्षियों-ध्वनियों-चाँद-सूरज-रोषनी का अनुभव कर पाया-अपने अन्दर-बाहर, आते-जाते मैं अपने आसपास घटती घटनाओं ...
image परिशिष्ट: बहुत कठिन है डगर पनघट की
(चित्रकार सिद्धार्थ से विजय शंकर की बातचीत) विजय शंकर: स्मृतियों का जीवन बहुत छोटा होता है उसे विस्मृतियाँ ढँक लेती है लेकिन मिथक, किंवदन्तियाँ जिसे हम श्रुतियाँ भी कहते हैंकृएक जीवन्त आस्था है। आप कला ...
image सुसज्जित गाय
चित्रकार सिद्धार्थ विरचित महाकाव्यः चैत्र कृष्णपक्ष त्रयोदशी, विक्रम संवत् 2066 सर्ग-1: खोई हुई गाय कलियुग के भौतिकवाद और अर्थलिप्सा ने गऊ को कामधेनु से कामधन में बदल दिया-आर्थिक और राजनीतिक लाभ के लिए उसका शोषण किया जा रहा ...
image गाय हँसती है
समीक्षा कृष्ण  भूमि आज का मिथक है। दूध दही की नदियों के देश  में दूध प्लास्टिक की थैलियों में मिल रहा है। यशोदा को दही बिलोने की ज़रूरत नहीं रह गयीक-अनब्रांडेड उत्पादों का बाज़ार ...