यह असमय की कथा है। तब मनुष्य नहीं थे। न उसका सोच था, न समय, न उसका अंह था न उसका स्वार्थ। किसी महासंग्राम की बेला में ईश्वर ने सोचा होगा एक ऐसे जीव की रचना करें जो न सुर हो न असुर। इन दोनों के बीच का प्राणीकृ जो अपने सोच से, आचरण से, [...]
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कन्नड़ पुराकथा
चित्र के छह अंगकृ (रवीन्द्रनाथ ठाकुर की व्याख्या)
चित्रकार सिद्धार्थ विरचित महाकाव्यः
परिशिष्ट: बहुत कठिन है डगर पनघट की
सुसज्जित गाय
गाय हँसती है