सम्पादकीय

असमय की कथा

यह असमय की कथा है। तब मनुष्य नहीं थे। न उसका सोच था, न समय, न उसका अंह था न उसका स्वार्थ। किसी महासंग्राम की बेला में ईश्वर ने सोचा होगा एक ऐसे जीव की रचना करें जो न सुर हो न असुर। इन दोनों के बीच का प्राणीकृ जो अपने सोच से, आचरण से, […]



सम्पादकीय: खोई हुई पगडण्डियाँ

जैसे मनुष्य अधूरा है वैसे मनुष्य की कला अधूरी है। इस अधूरेपन का अहसास ही जीवन को सौन्दर्यमय और गतिशील बनाने में तत्पर रहता है। इस अधूरेपन को कभी मृत्यु अर्थ देती है, कभी जीवन की दूसरी आवश्यकताएँ। इन दोनों से बचकर मनुष्यता ने यदि कुछ हासिल किया है तो वह है मिथकों की स्थापना […]



सम्पादकीय: इस अगम परिसर में

पिछले दिनों महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी ने सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन, नागपुर में आयोजित किया था। यह दूसरा आयोजन था। पहला उन्होंने मुम्बई में किया था। मैंने भी उसमें शिरकत  की थी। मुझे बहुतखुशी हुई। साहित्य अकादेमी, दिल्ली को छोड़कर शायद ही किसी राज्य की अकादेमी ने इस तरह की पहल की हो। महाराष्ट्र […]



Editorial 1

कवि-बिम्बों से ही समृद्ध होती है:- ‘एकला चलो’ वाले रबीन्द्रनाथ, ‘चीर डालो ओ प्रभु लालसा में भरा ये हृदय’ की अक्का महादेवी, ‘नाचत है कुलनासी’ वाली मीरा, ‘डुबोया मुझको होने ने’ वाले ग़ालिब, ‘अभी टुक रोते-रोते सो गया है’ वाले मीर-जिनकी क़ब्र आजहर महान कवि अन्ततः एक बिम्ब हो जाता है। काव्य-कर्म चेतन-अवचेतन के रूप […]



Editorial 2

पिछले दिनों महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी ने सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन, नागपुर में आयोजित किया था। यह दूसरा आयोजन था। पहला उन्होंने मुम्बई में किया था। मैंने भी उसमें शिरकत  की थी। मुझे बहुतखुशी हुई। साहित्य अकादेमी, दिल्ली को छोड़कर शायद ही किसी राज्य की अकादेमी ने इस तरह की पहल की हो। महाराष्ट्र […]



Editorial 4

पिछले दिनों महारास्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी ने सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन, नागपुर में आयोजित किया था। यह दूसरा आयोजन था। पहला उन्होंने मुम्बई में किया था। मैंने भी उसमें शिरकत की थी। मुझे बहुत खुशी हुई। साहित्य अकादेमी, दिल्ली को छोड़कर षायद ही किसी राज्य की अकादेमी ने इस तरह की पहल की हो। […]